यह बात २२ जून २००८ की है ,मैं अपनी दोस्त की शादी में गयी हुई थी,मेरे साथ मेरी दो साल की बेटी भी गयी हुई थी,शादी खत्म होने के बाद मेरी दोस्त अपने ससुराल चली गयी और मैं भी घर जाने की तैयारी करने लगी लेकिन मेरी दोस्त की माँ मुझे और रुकने के लिए बोलने लगी, क्यूंकि एक दिन बाद मेरी दोस्त अपने ससुराल से वापस आने वाली थी मैं उनकी बात मान गयी और अपने घर फ़ोन करके बता दिया की मैं एक दिन बाद घर आउंगी!
शादी के अगले दिन घर पर कुछ मेहमान रुक गये थे कुछ बूढी औरतें भी थी सब बरामदे में नीचे बिस्तर लगा कर सोये हुए थे, मैं भी अपनी बेटी के साथ नीचे ही सोयी हुई थी! सब लोग बहुत थके हुए थे इसलिए सब जल्दी ही सो गये,आधी रात के करीब मेरी बेटी रोने लगी मैंने चुप कराने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नहीं चुप हो रही थी, उसके रोने के कारण बाकी लोगों को सोने में दिक्कत हो रही थी खासकर बूढी औरतों को इसलिए उसे शान्त कराने के लिए मैं अपनी बेटी को लेकर छत पर चली गयी, छत पर एक चारपाई बिछी हुई थी,मैं अपनी बेटी को लेकर उस पर बैठ गयी और बेटी को शांत कराने लगी आधी रात थी, पूरा चाँद निकला हुआ था इसलिए काफी रौशनी थी लेकिन बिलकुल सन्नाटा था,मैं अपनी बेटी को गोद में लेकर बैठी हुई थी तभी अचानक मुझे लगा की कोई मेरे बगल में बैठा हुआ है मैं डर कर तुरंत चारपाई से उठ गयी और देखा तो वहां एक सुन्दर सी औरत बैठी हुई थी और मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी मैं कुछ देर खड़ी उससे देखती रही तभी मेरी बेटी रोने लगी,उस औरत ने कहा लाओ अपनी बेटी को मुझे दो मैं इसे शांत करा देती हूँ, मैंने उससे पूछा की आप कौन है?
उसने मेरी बेटी को मेरे हाथ से लेते हुए कहा की मैं यहीं पड़ोस में रहती हूँ,और हम दोनों चारपाई पर बैठ गये लेकिन अजीब बात थी की मैंने उस औरत को शादी में नहीं देखा था वो मेरी बेटी को प्यार से खेला रही थी मैं बस उसे देख रही थी उसके चेहरे पर अजीब सी मायूसी थी बिलकुल शांत, मैंने उससे पूछा की आप शादी में आई थीं? लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया जैसे उसने सुना ही नहीं, वो बस मेरी बेटी को गोद में लेकर बैठी हुई थी, मैंने देखा की उसकी आँखें बिलकुल पथराई हुई थीं और वो आँखें झपका भी नहीं रही थी उसका बदन बिलकुल पीला था मुझे डर लग रही थी, मैं फ़ौरन वहां से भाग जाना चाहती थी लेकिन मेरी बेटी उसके पास थी इसलिए मैं चुप-चाप बैठी हुई थी और डर के कारण मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था, कुछ देर में मेरी बेटी ने रोना बंद कर दिया और शांत हो गयी, तब उस औरत ने कहा की अब तुम्हारी बेटी चुप हो गयी है लो इसे सुला दो मैंने अपनी बेटी को लेने के लिए हाथ बढाया तभी मेरा हाथ उस औरत के हाथ से छु गया उसका हाथ बिलकुल ठंडा था बहुत ठंडा, मैंने अपनी बेटी को गोद में लिया और तेज़ी से सीढ़ी की तरफ जाने लगी सीढ़ी के पास पहुँच कर मैंने पीछे मुड़ कर देखा, और डर के मारे मेरी चीख निकल गयी!
मैंने देखा की वो औरत छत की बाउंड्री के ऊपर खड़ी हुई है और उसका पीछे का पूरा बदन सर से लेकर पांव तक बुरी तरह से जला हुआ है और देखते ही देखते वो छत से कूद गयी,मैं जोर से चीखी और भागती हुई नीचे आई, नीचे सो रहे सभी लोग जाग गये और मुझसे पूछने लगे की, क्या हुआ,क्या हो गया?
मैं कुछ बोल नहीं पा रही थी डर के कारण मैं रो रही थी और बुरी तरह से काँप रही थी, तभी मेरी दोस्त की माँ वहां आई और मुझे अपने साथ अपने कमरे में ले गयी और मुझे बेड पर लिटाया कुछ और औरतें भी वहां आ गयी और मेरा हाथ पाँव और सर सहलाने लगी मुझे पानी पिलाया कुछ देर बाद मैं थोड़ी शांत हुई और उन्हें बताया की मेरे साथ क्या हुआ था,मेरी बात सुनने के बाद आंटी ने कहा की बेटा तुम्हे इतनी रात में छत पर नहीं जाना चाहिए था, फिर उन्होंने आगे बताया की कुछ समय पहले यहाँ पड़ोस में एक औरत को उसके घर वालों ने जला कर मार डाला था तभी से उसकी आत्मा लोगों को परेशान करती है! कई लोगों ने मरने के बाद उसे देखा है!
मैं उस दिन सारी रात नहीं सो पायी वो रात मेरी ज़िन्दगी की सबसे लम्बी और भयानक रात थी, मैं बस सुबह होने का इंतज़ार कर रही थी और सुबह होते ही मैं अपने बेटी को लेकर वहां से अपने घर चली आई, मैं अभी तक उस घटना को भुला नहीं पायी हूँ!
शादी के अगले दिन घर पर कुछ मेहमान रुक गये थे कुछ बूढी औरतें भी थी सब बरामदे में नीचे बिस्तर लगा कर सोये हुए थे, मैं भी अपनी बेटी के साथ नीचे ही सोयी हुई थी! सब लोग बहुत थके हुए थे इसलिए सब जल्दी ही सो गये,आधी रात के करीब मेरी बेटी रोने लगी मैंने चुप कराने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नहीं चुप हो रही थी, उसके रोने के कारण बाकी लोगों को सोने में दिक्कत हो रही थी खासकर बूढी औरतों को इसलिए उसे शान्त कराने के लिए मैं अपनी बेटी को लेकर छत पर चली गयी, छत पर एक चारपाई बिछी हुई थी,मैं अपनी बेटी को लेकर उस पर बैठ गयी और बेटी को शांत कराने लगी आधी रात थी, पूरा चाँद निकला हुआ था इसलिए काफी रौशनी थी लेकिन बिलकुल सन्नाटा था,मैं अपनी बेटी को गोद में लेकर बैठी हुई थी तभी अचानक मुझे लगा की कोई मेरे बगल में बैठा हुआ है मैं डर कर तुरंत चारपाई से उठ गयी और देखा तो वहां एक सुन्दर सी औरत बैठी हुई थी और मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी मैं कुछ देर खड़ी उससे देखती रही तभी मेरी बेटी रोने लगी,उस औरत ने कहा लाओ अपनी बेटी को मुझे दो मैं इसे शांत करा देती हूँ, मैंने उससे पूछा की आप कौन है?
उसने मेरी बेटी को मेरे हाथ से लेते हुए कहा की मैं यहीं पड़ोस में रहती हूँ,और हम दोनों चारपाई पर बैठ गये लेकिन अजीब बात थी की मैंने उस औरत को शादी में नहीं देखा था वो मेरी बेटी को प्यार से खेला रही थी मैं बस उसे देख रही थी उसके चेहरे पर अजीब सी मायूसी थी बिलकुल शांत, मैंने उससे पूछा की आप शादी में आई थीं? लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया जैसे उसने सुना ही नहीं, वो बस मेरी बेटी को गोद में लेकर बैठी हुई थी, मैंने देखा की उसकी आँखें बिलकुल पथराई हुई थीं और वो आँखें झपका भी नहीं रही थी उसका बदन बिलकुल पीला था मुझे डर लग रही थी, मैं फ़ौरन वहां से भाग जाना चाहती थी लेकिन मेरी बेटी उसके पास थी इसलिए मैं चुप-चाप बैठी हुई थी और डर के कारण मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था, कुछ देर में मेरी बेटी ने रोना बंद कर दिया और शांत हो गयी, तब उस औरत ने कहा की अब तुम्हारी बेटी चुप हो गयी है लो इसे सुला दो मैंने अपनी बेटी को लेने के लिए हाथ बढाया तभी मेरा हाथ उस औरत के हाथ से छु गया उसका हाथ बिलकुल ठंडा था बहुत ठंडा, मैंने अपनी बेटी को गोद में लिया और तेज़ी से सीढ़ी की तरफ जाने लगी सीढ़ी के पास पहुँच कर मैंने पीछे मुड़ कर देखा, और डर के मारे मेरी चीख निकल गयी!
मैंने देखा की वो औरत छत की बाउंड्री के ऊपर खड़ी हुई है और उसका पीछे का पूरा बदन सर से लेकर पांव तक बुरी तरह से जला हुआ है और देखते ही देखते वो छत से कूद गयी,मैं जोर से चीखी और भागती हुई नीचे आई, नीचे सो रहे सभी लोग जाग गये और मुझसे पूछने लगे की, क्या हुआ,क्या हो गया?
मैं कुछ बोल नहीं पा रही थी डर के कारण मैं रो रही थी और बुरी तरह से काँप रही थी, तभी मेरी दोस्त की माँ वहां आई और मुझे अपने साथ अपने कमरे में ले गयी और मुझे बेड पर लिटाया कुछ और औरतें भी वहां आ गयी और मेरा हाथ पाँव और सर सहलाने लगी मुझे पानी पिलाया कुछ देर बाद मैं थोड़ी शांत हुई और उन्हें बताया की मेरे साथ क्या हुआ था,मेरी बात सुनने के बाद आंटी ने कहा की बेटा तुम्हे इतनी रात में छत पर नहीं जाना चाहिए था, फिर उन्होंने आगे बताया की कुछ समय पहले यहाँ पड़ोस में एक औरत को उसके घर वालों ने जला कर मार डाला था तभी से उसकी आत्मा लोगों को परेशान करती है! कई लोगों ने मरने के बाद उसे देखा है!
मैं उस दिन सारी रात नहीं सो पायी वो रात मेरी ज़िन्दगी की सबसे लम्बी और भयानक रात थी, मैं बस सुबह होने का इंतज़ार कर रही थी और सुबह होते ही मैं अपने बेटी को लेकर वहां से अपने घर चली आई, मैं अभी तक उस घटना को भुला नहीं पायी हूँ!
शालिनी चौधरी,काशीपुर (उत्तराखंड)
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