Monday, May 2, 2016

दाह संस्कार!

मान्यता हैं की जिसका दाह संस्कार किसी कारणवश नहीं हो पाता है उसकी आत्मा भटकती रहती है!
हालाँकि मुझे इन् सब बातों पर कभी विश्वास नहीं था की आत्मा या भूत जैसी कोई चीज़ होती भी है लेकिन दो साल पहले घटी एक घटना ने मुझे इन् बातों पर विश्वास करने पर मजबूर कर दिया!
आज से दो साल पहले की बात है मेरे घर के पड़ोस वाले घर में एक आदमी का एक दुर्घटना में देहांत हो गया था जिसके कारण उनका शव नहीं मिल पाया था और उनका दाह संस्कार भी नहीं हो पाया था उनकी मृत्यु के पहले उनके घर में सब कुछ ठीक-ठाक था सभी लोग खुश थे हमारे घर से उनका आना जाना भी था लेकिन मृत्यु के फ़ौरन बाद से ही उनका घर में अजीबों ग़रीब घटनाएं घटने लगी जिस व्यक्ति की मृत्यु हुई थी वो अपने घर में दिखाई देने लगा कभी वो किसी को बैठा हुआ दिखायी देता कभी सीढ़ियों के पास खड़ा रहता उससे देख कर घर वाले डर जाया करते थे उनके घर से खुशियाँ जैसे गायब सी हो गयी थी हमेशा मनहूसियत सी रहती थी उसी दौरान उनका एक बेटा छत से गिरकर मर गया बेटे की अकस्मात् मृत्यु के कारण माँ बाप का बुरा हाल था,उनके घर हमेशा कोई न कोई बीमार रहता ही था यहाँ तक की उस घर के पेड़ पौधे भी मुरझा गए थे रात में उनके घर के लोगों को डरावनी आवाजें सुनाई देती थी,कोई उनका दरवाज़ा खटखटाता था और दरवाज़ा खोलने पर वहां कोई नहीं होता था इन् सब चीज़ों से उनका जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा था उनकी पुत्रवधू को आये चार वर्ष हो चुके थे इस दौरान वो तीन बार गर्भवती भी हुई लेकिन किसी कारणवश उसे संतान का सुख नहीं प्राप्त हो रहा था तीनों बार उसके बच्चे किसी कारणवश पैदा होते ही मर जा रहे थे उनके घर में अजीब अजीब सी घटनाएँ घट रही थी घर के सभी लोग हमेशा परेशान रहा करते थे,डर के कारण उनके घर किसी का आना जाना भी बंद हो गया था उनके घर की बहुत बार झड फूँक भी हुई लेकिन कोई फायदा नहीं पहुंचा स्थिति ज्यूँ की त्यूं बनी हुई थी!
मेरे पिताजी का उनके घर से अच्छा सम्बन्ध था मेरे पिताजी के एक मित्र अच्छे पंडित थे और तंत्र मंत्र भी जानते थे तो मेरे पिताजी ने उन्हें पूरी बात बताई तो पंडितजी ने उस घर पर चलने की इच्छा ज़ाहिर की!
एक दिन मेरे पिताजी पंडितजी को साथ ले कर उनके घर पर गये पंडितजी ने फ़ौरन ही बता दिया की इस घर में किसी की अतृप्त आत्मा भटक रही है जिसके कारण-वश इस घर में कोई भी शुभ कार्य संभव नहीं है इसलिए आपके घर कोई नया मेहमान नहीं आ पा रहा है जब तक उस व्यक्ति का अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान के साथ उसी स्थान पर नहीं कराया जाता जिस स्थान पर उसकी मृत्यु हुई है तब तक उस व्यक्ति की आत्मा यूँ ही भटकती रहेगी और परेशान करती रहेगी क्यूंकि इस तरह की मृत्यु होना और दाह संस्कार न हो पाना हिन्दू धरम में अशुभ मन गया है!
फिर घरवालों के कहने पर उन्ही पंडितजी ने पूरे विधि विधान के साथ उस व्यक्ति का उसी जगह अंतिम संस्कार किया जहाँ दुर्घटना हुई थी तब जा कर उसकी आत्मा को शान्ति मिली और घर में घटने वाली अजीब अजीब घटनाएँ बंद हो गयी और एक साल के भीतर ही उनकी पुत्रवधू को संतान की प्राप्ति भी हुई!
प्रसन्न राज, पटना (बिहार)

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