Monday, May 2, 2016

पीछा करती दादी की आत्मा

उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद के सुनील चंदोला बताते हैं की उत्तराखंड के जिला पौड़ी गढ़वाल के गाँव धैतरी गाढ़ में एक शादी के समारोह में मैं गया था,शादी की तमाम रस्मों का आनंद लेने के बाद देर रात क़िस्सागोई होने लगी जिसमें किस्से कहानियां सुनाई जाती है, जो की आमतौर पर उत्तराखण्ड में अधिकतर सामाजिक समारोहों के दौरान लोगों के आचार-व्यवहार और पुँरानी कथाओं को स्मरण करने का ज़रिया भर है!
ठंडी की सर्द रात में हम चाय की चुस्कियों के बीच किस्से कहानियों का मज़ा लेने लगेहालाँकि वहां रजाइयों की कमी थी फिर भी हम ठिठुरे हुए किस्से कहानियों का भरपूर आनंद ले रहे थे,मेरे ताउजी ने भूत प्रेत के किस्से कहानिओं का आरम्भ कर दिया जिससे माहौल में एक खौफ सा छा गया था भूत प्रेत की कहानियों के दौरान हलकी सी आवाज़ भी भय को दूना कर देती है और दूर से आती कुत्तो और सियार की भयानक आवाजें माहौल को और भयावह बना रही थी इसी डर मिश्रित माहौल के बीच मेरे ताउजी ने मेरी मृतक दादी जी का किस्सा सुनाया और कुछ इस तरह किस्से का वर्णन किया की पूरा किस्सा जैसे हमारी आँखों के सामने चल रहा हो, वो किस्सा भयावह और रूह कंपाने वाला था!
रात के करीब एक बजे किस्से कहानियों का दौर ख़त्म हुआ और सब सोने की तय्यारी करने लगे, सोने का इंतज़ाम घर से कुछ दूरी पर था लेकिन रजाइयों की कमी के कारण मैं ठीक से नहीं सो पा रहा था इसलिए मैं घर की तरफ रवाना हुआ बमुश्किल 80 फुट दूर जाने पर मुझे लगा की कोई मेरे पीछे आ रहा है मैंने दिल को हौसला बंधाया और तेज़ी से आगे बढ़ने लगा अब घर मुश्किल से 50 फुट दूर था जैसे जैसे मैं आगे बढ़ने लगा मुझे लगा की कोई चेज़ मुझे पकड़ रही है अनजाने भय से ग्रस्त मैं आगे बढ़ा और मकान की सीढियां चढ़ने लगा और जैसे ही मैं मेन गेट की सांकल खोल के अन्दर गया और अन्दर से गेट बंद करने के लिए मुड़ा तो बहार मुझे एक धुंधली सी आकृति दिखी जो मुझे उस दादी(पूर्व उल्लिखित) सी प्रतीत हुई मेरा खून जमने सा लगा मैं भाग कर आगे बढ़ा और मकान का दरवाज़ा खटखटाया इससे पहले की कोई दरवाज़ा खोलता मैंने पुनः पीछे मुड़ कर देखना चाहा मैं जैसे ही पीछे मुड़ा वो आकृति बिलकुल स्पष्ट रूप में मेरे सामने खड़ी थी वो आकृति अस्पष्ट भाषा में कुछ बोल रही थी भय के कारण कुछ समझ नहीं आ रहा था सहसा डर के कारण मेरे माथे पर पसीने की बूँद जमा हो गयी थी और डर के कारण मैं काँप रहा था और तभी किसी ने दरवाज़ा खोल दिया और मैं अन्दर चला गया!
मैं पूरी रात अपने ईष्ट देवों को याद करते हुए गुज़ार दी ऐसा अनुभव मेरे ज़िन्दगी में पहली बार हुआ था पहली बार मैं इतना डरा था मैं सारी रात न सो सका!
सुनील चन्दोला, नजीबाबाद (उत्तर प्रदेश)

No comments:

Post a Comment